Posts

Showing posts with the label हिंदी साहित्य

केशव का जीवन परिचय प्रमुख रचनाएं शिक्षा दीक्षा भाषा शैली और काव्यगत विशेषताएँ

केशव का जीवन परिचय प्रमुख रचनाएं शिक्षा दीक्षा भाषा शैली और काव्यगत विशेषताएँ ​ जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि हिंदी साहित्य में रीतिकाव्य के आदि प्रवर्तक आचार्य केशवदास का जन्म 1555 ईसवी में बुंदेलखंड के ओरछा में हुआ था। इनके पिता का नाम काशीनाथ मिश्र था, जो ओरछा नरेश के दरबार में अत्यंत सम्मानित राजकवि थे। केशवदास एक कुलीन सनाढ्य ब्राह्मण परिवार से संबंध रखते थे, और इनके परिवार में संस्कृत विद्या और शास्त्र-ज्ञान की एक लंबी और अत्यंत समृद्ध परंपरा थी। इनका पारिवारिक परिवेश इतना अधिक विद्वतापूर्ण था कि किंवदंतियों के अनुसार इनके घर के दास और दासी भी संस्कृत भाषा में ही वार्तालाप किया करते थे, जिससे केशव को बचपन से ही गहन शास्त्रीय संस्कार प्राप्त हुए। ​ दरबारी संबंध और प्रमुख आश्रयदाता आचार्य केशवदास मुख्य रूप से ओरछा नरेश महाराज रामसिंह के अनुज इंद्रजीत सिंह के राजदरबार में राजकवि, मंत्री और गुरु के सर्वोच्च पद पर आसीन थे। महाराज इंद्रजीत सिंह ने केशवदास की विद्वता से प्रभावित होकर उन्हें अपना आध्यात्मिक और साहित्यिक गुरु माना था और सम्मान स्वरूप उन्हें इक्कीस गाँव भेंट में ...

मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय प्रमुख रचनाएं शिक्षा दीक्षा भाषा शैली और काव्यगत विशेषताएँ

  मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय प्रमुख रचनाएं शिक्षा दीक्षा भाषा शैली  और काव्यगत विशेषताएँ ​पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं प्रारंभिक जीवन ​राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 को उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले के चिरगाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम सेठ रामचरण कनकने और माता का नाम काशीबाई था। इनका परिवार संपन्न और गहरे धार्मिक संस्कारों वाला था। इनके पिता भगवान राम के अनन्य भक्त थे और स्वयं भी कविताएँ लिखा करते थे। पिता की इसी रामभक्ति और काव्य-प्रेम का अत्यंत गहरा और सकारात्मक प्रभाव गुप्त जी के बाल-मन पर पड़ा, जिसने आगे चलकर इनके साहित्यिक जीवन की ठोस आधारशिला रखी। ​शिक्षा एवं साहित्यिक अभिरुचि ​गुप्त जी की प्रारंभिक शिक्षा उनके पैतृक गाँव चिरगाँव के ही एक स्थानीय विद्यालय में संपन्न हुई। विद्यालयीन शिक्षा में अधिक रुचि न होने के कारण इन्होने घर पर ही स्वाध्याय के माध्यम से संस्कृत , बांग्ला , और हिंदी भाषा का अत्यंत गहन अध्ययन किया। इसके अतिरिक्त, इन्होने प्राचीन भारतीय धर्मग्रंथों, उपनिषदों और महाकाव्यों का भी सूक्ष्मता से पठन-पाठन किया। मुंशी अजमेरी के सान्न...

मलिक मोहम्मद जायसी का जीवन परिचय प्रमुख रचनाएं शिक्षा दीक्षा भाषा शैली और काव्यगत विशेषताएँ

मलिक मोहम्मद जायसी का जीवन परिचय प्रमुख रचनाएं शिक्षा दीक्षा भाषा शैली और काव्यगत विशेषताएँ ​ जन्म और स्थान: मलिक मोहम्मद जायसी का जन्म अनुमानतः 1492 ईसवी के आसपास हुआ था। उनका मूल निवास उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले का जायस नगर था, जिसकी पुष्टि उनके काव्य की पंक्ति " जायस नगर मोर अस्थानू " से भली-भांति हो जाती है। वे जन्म से ही अत्यंत निर्धन और साधारण परिवेश के थे। बचपन में भयंकर चेचक के प्रकोप के कारण वे रूपहीन और एक आंख से काने हो गए थे, किंतु उनकी अंतर्दृष्टि अत्यंत प्रखर थी। ​ गुरु और संप्रदाय: जायसी निर्गुण भक्ति धारा की प्रेमाश्रयी (सूफी) शाखा के सर्वप्रमुख और प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। उन्होंने अपने काव्यों में अपने गुरुओं का अत्यंत श्रद्धापूर्वक स्मरण किया है। उनके प्रमुख दीक्षा गुरु सूफी फकीर शेख मोहिदी (मुहीउद्दीन) तथा सैयद अशरफ जहाँगीर थे। उन्होंने चिश्ती संप्रदाय की सूफी रहस्यवादी परंपरा को अपनाया और लौकिक प्रेम (इश्क मिजाजी) के माध्यम से अलौकिक प्रेम (इश्क हकीकी) की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया। ​ काव्यगत विशेषताएं: जायसी का काव्य ज्ञान और प्रेम...