बच्चे बात क्यों नहीं मानते ? Why Don't Children Listen?

समस्या : बच्चे बात क्यों नहीं मानते हैं ?

Why Don't Children Listen?

अकसर हम और आप कुछ बातें अपने आस पास हमेशा सुनते बोलते रहते है:- 

  • हमारा बच्चा तो हमारी बात ही नहीं सुनता। 
  • हमारा बच्चा हमारी बात ही न मानता। 
  • हम तो अपने बच्चे को बहुत समझाते है लेकिन वह हमारी एक भी बात न सुनता। 
  • आपका बच्चा कितना अच्छा है, हर बात मानता है। 

आइये समझें कि आखिर इन साब बातों के पीछे किस तरह का मनोविज्ञान काम करता है। अगर आप विज्ञान के विद्यार्थी रहे हों तो आपने वैज्ञानिक न्यूटन द्वारा दिया गया गति का तीसरा नियम अवश्य पढ़ा होगा जो कहता है कि - "हर क्रिया के फलस्वरूप विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।" बस यही वह कारण है जो आपको यह साबित करने के लिए काफी है कि बच्चे बात क्यों नहीं सुनते हैं। 

आज के वैज्ञानिक व प्रतियोगी युग में हम इतने ज्यादा व्यस्त हो चुके हैं कि हमारे पास किसी दूसरे के लिए समय ही नहीं है फिर चाहे वह हमारे आपके अपने ही बच्चे क्यों न हों। हमारी ज्यादा व्यस्तता के कारण हम अपने बच्चों को जरा भी समय नहीं दे पाते हैं और हर वक्त अपने व्यवसाय, नौकरी या अन्य कार्यों में लगे रहते हैं।

हमारे बच्चे जब हमसे अपनी कोई समस्या साझा करना चाहते हैं या हमारे साथ मनोरंजन हेतु समय बिताना चाहते हैं तो हम उन्हें जरूरी काम का हवाला देकर उनसे दूर हो जाते हैं। दरअसल हम जिस काम का हवाला देकर बच्चों के साथ समय नहीं बिता पाते, बेशक वह कार्य अतिआवश्यक हो सकता है परन्तु इसका आशय यह नहीं कि बच्चा जो समय हमारे आपके साथ समय बिताना चाहता है वह व्यर्थ है। 

जिस प्रकार हमें अपने कार्य में रूचि है, आगे बढ़ने का जज्बा इत्यादि है उसी प्रकार बच्चे जो वक्त हमारे आपके साथ बिताना चाहते हैं उनमें बच्चों की खुशी होती है जो आपके मना करने पर मर जाती है।


​अब हम और आप इस बात का हवाला दे सकते हैं कि अगर काम नहीं करेंगे और बच्चों को समय देंगे तो फिर बच्चों को कैसे पालेंगे या उनका खर्चा कैसे उठायेंगे ? बात एकदम सही है कि बच्चों और परिवार के लिए ही हम दिन रात काम में लगे हैं।  परन्तु, कुछ सवाल हैं। 

  • क्या हमारे आपके चक्कर में बच्चा अपना बचपन मार दे ? 
  • क्या इन घटनाओं से उसकी भावनाओं को ठेस न पहुँचेगी ? 
  • क्या इस तरह से नजरअंदाज करने से बच्चा और हम आप के बीच दूरी नहीं बढ़ेगी ?

जवाब यह है कि, बच्चे को जब हम आप बिल्कुल समय नहीं देंगे तो बच्चे के दिल में अकेलापन घर कर लेगा या फिर बच्चे में जीवन भर के लिए सामाजिकता खत्म हो जायेगी या फिर बच्चा भी आपकी हमारी ही तरह एक अपनी दुनियां बना लेगा जो फोन के रूप में हो सकती है या फिर बुरी संगत के रूप में। जब यही सिलसिला आगे चलता रहेगा तो एक दिन हम और आप देखेंगे कि वह हमारी आपकी बात नहीं मानता। 


समाधान :

बेशक आज के दौर में हमारी व्यस्तता बहुत ज्यादा हो गई है फिर भी हमें चाहिए कि हम अपने बच्चों को समय दें। बच्चे बहुत समय नहीं चाहते बस कुछ चन्द लम्हे वो हमें आपको अपने रंग में रंगाकर देखकर खुश होना चाहते हैं। अगर हम उनकी इस खुशी में शामिल हो सकें तो हममें और उनमें एक भावनात्मक लगाव हो सकता है जिसका बहुत ही दूरगामी और सकारात्मक परिणाम हो सकता है। 

अगर हम-आप उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें थोड़ा समय देते रहें तो जब हमें उनकी बेहद आवश्यकता होगी तो वो सदैव हमेशा खुशी से हमारा आपका साथ देंगे और तब हमें नहीं कहना पड़ेगा कि बच्चे हमारी बात नहीं मानते।

Santosh Kumar 


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